तैश में आ कर ख़ुदा भी भार देता
जो पिता होते नहीं जग ख़ार देता
वक़्त अब देता मोहब्बत में नहीं मैं
साफ़ दिल है आप का सो यार देता
आप की है ख़ुश-नसीबी दस मिले दिन
दोस्त वरना दिन घटाता चार देता
इन दिनों जो इश्क़ करना सीख जाओ
फिर मोहब्बत मैं तुम्हें यकसार देता
खाद भी है केंचुआ है फ़सल है दिल
बे-वफ़ा वो यूरिया को प्यार देता
तिश्नगी कर के मिला कुछ भी नहीं तो
चाय पी अपनी तमन्ना मार देता
दोस्त से जो बात करता जोग की तो
रोग है ये छोड़ कह दुत्कार देता
वो हथेली माँगता अच्छी ग़ज़ल पे
चूमने को मैं उसे रुख़्सार देता
— Aman Vishwakarma 'Avish'















