"सवारी"

तुम्हारी भी कहानी है हमारी ही कहानी सी
बदल कर जी रहे सूरत हुई है रेत पानी सी
नहीं केवल ग़मों ने मारना चाहा हमें अक्सर
सभी ख़ुद्दार लोगों ने हमीं से बद-गुमानी की
भरोसे पे चले थे वो हमें पहले बचाएगा
हमें मालूम थोड़ी था भरोसा बेच खाएगा
चली बंदूक सी आँखें निगाहें फेरते ही जब
कभी सोचा नहीं खारा लहू सागर बनाएगा
यक़ीनन मानते थे हम बड़ा प्यारा हुआ करता
मोहब्बत में ज़रा पागल बड़ा पागल हुआ करता
बता दो नाथ तुम ने क्यूँ भला ये चीज़ दी हम को
वफ़ा देकर सज़ा दी क्यूँ नहीं उम्मीद दी हम को
लगी है जंग काग़ज़ पर अदावत रोज़ जारी है
पड़े टूटे हुए चक्के यही जीवन सवारी है

— Aman Vishwakarma 'Avish'

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