मंज़िल पाकर ही रहना है
अभी नहीं कुछ भी कहना है
अच्छा तुम को जाना है क्या
जाओ तन्हा ग़म सहना है
वक़्त बुरा है ताना दोगे
कह लो जिस को जो कहना है
आज बुरा कल अच्छा होगा
दौर समय का ही गहना है
'रंजन' यक़ीं करो ख़ुद पर तुम
विचलित हो के नइँ ढहना है
— ABHISHEK RANJAN















