सुर्ख़ लब मासूम सूरत सादगी में खो गया
एक माॅं का लाल देखो फिर किसी का हो गया
रास्ता मुश्किल था माना चुन लिया तो चुन लिया
हौसला बस हारना मत जो डरा वो तो गया
एक कमरे में सिमट कर रह गई अब ज़िंदगी
गाॅंव की हलचल को सोचा याद कर के रो गया
सोचते थे सोचते हैं सोच कर क्या कर लिए
उम्र गुज़री सोचने में सोच कर फिर सो गया
— ABHISHEK RANJAN















