तुम सेे बातें भी करूँँ तो क्या करूँँ
इस घड़ी कैसे कोई वा'दा करूँ
दर्द ही मिलता है अक्सर प्यार में
इश्क़ में अब हाँ करूँ या ना करूँ
ओ मुसाफ़िर जा रहे हो तो कहो
ख़्वाब के टुकड़े या फिर आधा करूँ
कौन कहता है कि तुम हो बे-वफ़ा
जा रही हो क्यूँ तुम्हें रुस्वा करूँ
मैं नहीं अब प्यार कोई और है
कह रही 'रंजन' कि मैं आया करूँ
— ABHISHEK RANJAN















