ख़ुद तो ख़ुद में कम रहते हैं
तुम में ज़्यादा हम रहते हैं
थम जाए जब प्यार की बारिश
याद में नयना नम रहते हैं
दर्द ए दिल धड़कन से पूछे
बाक़ी कितने दम रहते हैं
दिल का गुलशन जब से उजड़ा
पतझड़ के मौसम रहते हैं
थे 'जस्सर' से कभी जो रौशन
वो चेहरे मद्धम रहते हैं
— Avtar Singh Jasser















