शदीद ज़हनी दबाव को कम किया जाएये सोचना है कि अब किस का ग़म किया जाएहम अपनी वहशते टीलों को सौंप देंगे मगरतुम्हारा हुस्न भी सहरा में ज़म किया जाएवो शोख ज़िस्म निगाहों पे खुल नहीं रहा हैख़ुदाए हुस्ने ज़माना करम किया जाए— Azbar Safeer