मोहब्बत का न दुनिया का न दीं का
किसी का भी नहीं झूठा कहीं का
अभी थी रास्ते में आशनाई
स्टेशन आ गया उस महजबीं का
किसी का पाँव चूमा हो तो समझो
फ़लक से कम नहीं रुतबा ज़मीं का
उसे साँपों से ख़ौफ आता है 'अज़हर'
बटन लगवाऊँ कैसे आस्तीं का
— Azhar Faragh
किसी का भी नहीं झूठा कहीं का
अभी थी रास्ते में आशनाई
स्टेशन आ गया उस महजबीं का
किसी का पाँव चूमा हो तो समझो
फ़लक से कम नहीं रुतबा ज़मीं का
उसे साँपों से ख़ौफ आता है 'अज़हर'
बटन लगवाऊँ कैसे आस्तीं का
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