neend palkon pe yuñ rakhi si hai | नींद पलकों पे यूँँ रखी सी है

  - Azhar Nawaz

नींद पलकों पे यूँँ रखी सी है
आँख जैसे अभी लगी सी है

अपने लोगों का एक मेला है
अपने-पन की यहाँ कमी सी है

ख़ूबसूरत है सिर्फ़ बाहरस
ये इमारत भी आदमी सी है

मैं हूँ ख़ामोश और मिरे आगे
तेरी तस्वीर बोलती सी है

चारासाज़ो मिरा इलाज करो
आज कुछ दर्द में कमी सी है

  - Azhar Nawaz

Nigaah Shayari

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