बिखेरता है क़यास मुझ को समेट लेती है आस मुझ कोमैं छुप रहा हूँ कि जाने किस दमउतार डाले लिबास मुझ कोदिखा गई है सराब सारेबस एक लम्हे की प्यास मुझ कोमैं मिल ही जाऊँगा ढूँड लीजेयहीं कहीं आस-पास मुझ कोजो तुम नहीं हो तो लग रहा हैहर एक मंज़र उदास मुझ को— Aziz Nabeel