jis dil ne rulaaya hai usii dil kii taraf hooñ | जिस दिल ने रुलाया है उसी दिल की तरफ़ हूँ

  - Dharmesh bashar

जिस दिल ने रुलाया है उसी दिल की तरफ़ हूँ
लगता है कि मैं फिर किसी मुश्किल की तरफ़ हूँ

जब तेज़ क़दम था तो भटकता ही रहा मैं
आहिस्ता क़दम चल के मैं मंज़िल की तरफ़ हूँ

मौजें ही डुबोती रहीं मँझधार में मुझको
मौजों के करम से ही मैं साहिल की तरफ़ हूँ

दुनिया-ए-मसाइल के लिए ज़ेहन की जानिब
दुनिया-ए-मुहब्बत हो तो मैं दिल की तरफ़ हूँ

आईना-सिफ़त दिल है परखता है हक़ीक़त
जाहिल का तरफ़दार न आक़िल की तरफ़ हूँ

मुंसिफ़ के ही मानिंद की मक़्तूल की पुर्सिश
हर कोई 'बशर' समझा कि क़ातिल की तरफ़ हूँ

  - Dharmesh bashar

Aawargi Shayari

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