जिस दिल ने रुलाया है उसी दिल की तरफ़ हूँ
लगता है कि मैं फिर किसी मुश्किल की तरफ़ हूँ
जब तेज़ क़दम था तो भटकता ही रहा मैं
आहिस्ता क़दम चल के मैं मंज़िल की तरफ़ हूँ
मौजें ही डुबोती रहीं मँझधार में मुझको
मौजों के करम से ही मैं साहिल की तरफ़ हूँ
दुनिया-ए-मसाइल के लिए ज़ेहन की जानिब
दुनिया-ए-मुहब्बत हो तो मैं दिल की तरफ़ हूँ
आईना-सिफ़त दिल है परखता है हक़ीक़त
जाहिल का तरफ़दार न आक़िल की तरफ़ हूँ
मुंसिफ़ के ही मानिंद की मक़्तूल की पुर्सिश
हर कोई 'बशर' समझा कि क़ातिल की तरफ़ हूँ
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