shabnam ke aañsu phool par ye to vahii qissa hua | शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

  - Bashir Badr

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ
आँखें मिरी भीगी हुई चेहरा तिरा उतरा हुआ

अब इन दिनों मेरी ग़ज़ल ख़ुशबू की इक तस्वीर है
हर लफ़्ज़ ग़ुंचे की तरह खिल कर तिरा चेहरा हुआ

शायद उसे भी ले गए अच्छे दिनों के क़ाफ़िले
इस बाग़ में इक फूल था तेरी तरह हँसता हुआ

हर चीज़ है बाज़ार में इस हाथ दे उस हाथ ले
इज़्ज़त गई शोहरत मिली रुस्वा हुए चर्चा हुआ

मंदिर गए मस्जिद गए पीरों फ़क़ीरों से मिले
इक उस को पाने के लिए क्या क्या किया क्या क्या हुआ

अनमोल मोती प्यार के दुनिया चुरा कर ले गई
दिल की हवेली का कोई दरवाज़ा था टूटा हुआ

बरसात में दीवार-ओ-दर की सारी तहरीरें मिटीं
धोया बहुत मिटता नहीं तक़दीर का लिक्खा हुआ

  - Bashir Badr

DP Shayari

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