zakham tumhaare bhar jaayenge thodii der lagegi | ज़ख़्म तुम्हारे भर जाएँगे थोड़ी देर लगेगी

  - Basir Sultan Kazmi

ज़ख़्म तुम्हारे भर जाएँगे थोड़ी देर लगेगी
बे-सब्री से काम लिया तो और भी देर लगेगी

साहब आज तो अपना काम करा के जाएँगे हम
सारी शर्तें पूरी हैं फिर कैसी देर लगेगी

यूँँ बेहाल न हो ऐ दिल बस आते ही होंगे वो
कल भी देर लगी थी उन को आज भी देर लगेगी

सीख लिया है मैं ने अपने आप से बातें करना
फ़िक्र नहीं उन को आने में कितनी देर लगेगी

कौन रुके अब उस के दर पर शाम हुई घर जाएँ
इतना ज़रूरी काम नहीं है जितनी देर लगेगी

इतनी देर में कुछ के कुछ हो जाएँगे हालात
ख़त लिखने से ख़त मिलने तक जितनी देर लगेगी

मार-गज़ीदा कौन बचा है 'बासिर' शुक्र करो तुम
ठीक भी हो जाओगे लेकिन ख़ासी देर लगेगी

  - Basir Sultan Kazmi

Haalaat Shayari

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