shor men awaaz mudgham kyun karen | शोर में आवाज़ मुदग़म क्यूँ करें

  - Bhaskar Shukla

शोर में आवाज़ मुदग़म क्यूँ करें
कर रहे हैं जो सभी हम क्यूँ करें

सरफ़रोशी की तमन्ना है हमें
ज़ुल्म के आगे नज़र ख़म क्यूँ करें

रौशनी के वास्ते जल जाएँ हम
तीरगी का ख़ैर-मक़्दम क्यूँ करें

रास्ता हमने चुना है सोचकर
मुश्किलें तो आएंगी, ग़म क्यूँ करें

ये तिरंगा ही हमारी शान है
हम इसे यकरंग परचम क्यूँ करें

आप अपनी नफ़रतें कम कीजिये
हम मोहोब्बत को भला कम क्यूँ करें

  - Bhaskar Shukla

Awaaz Shayari

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