ab bhi ye masroof duniya sust hai raftaar men | अब भी ये मसरूफ़ दुनिया सुस्त है रफ़्तार में

  - Charagh Sharma

अब भी ये मसरूफ़ दुनिया सुस्त है रफ़्तार में
कल की ख़बरें पढ़ रही है आज के अख़बार में

एक घर की चार दीवारी में गुम हैं दो मकान
रोज़ ईंटें उग रही हैं पांचवी दीवार में

उस हसीं चहरे पे क़ाबिज़ ज़ुल्फ़ से लड़ना है तो
आइने से धार करिए धूप की तलवार में

इनके अंदर मौत का डर डाल ये मासूम लोग
सुनते आए हैं कि सब जाइज़ है जंग और प्यार में

  - Charagh Sharma

Dhoop Shayari

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