यार ये इत्तिफ़ाक़ तो देखो
उस को ही देखता है जो देखो
काश कोई मुझे हिला के कहे
देखो वो आ रहा है वो देखो
तीरगी से बहुत शिकायत थी
अब ज़रा देर शम्स को देखो
देखना चाहते हो अपना रक़ीब
आइना दे रहा हूँ लो देखो
ख़ूब-सूरत दिखाई देती है
गर यही रात सुब्ह को देखो
शौक़ से देखो हुस्न-ए-यार मगर
फिर न कुछ देखना हो तो देखो
— Charagh Sharma















