आप कहती हैं ख़ामोश हो जाता हूँ
मैं जो आँखों में मदहोश हो जाता हूँ
मैं हूँ ग़ाफ़िल जो रहता हूँ इक ख़्वाब में
तुम को लगता है बेहोश हो जाता हूँ
कल वो ग़ुस्सा थी और मैं ने देखा नहीं
फिर तो छायांक ख़ामोश हो जाता हूँ
पहले इक डीपी पे नाज़ सा होता था
अब अगर देखूॅं ग़म-कोश हो जाता हूँ
वो मुझे इक दफ़ा कह दे अच्छा सुनो
मैं तो खिलके न गुल-पोश हो जाता हूँ
उस के बिन तो खंडर सा हूँ मैं मेरा दिल
उस से मिलते ही फ़िरदौस हो जाता हूँ
— Chhayank Tyagi















