ये चेहरा इक दफ़ा तुम पढ़ कर के देख तो लो
कब से खड़ा हूँ बाहर दिल घर के देख तो लो
मिलते नहीं हैं मौक़े' हर रोज़ ऐसे जानम
इक बार मेरे लब पे लब धर के देख तो लो
तुम को पता नहीं है दर पे पड़ी है पागल
मत करना बात उस से चल कर के देख तो लो
अब इतनी भी बुरी शय दिल है नहीं मोहब्बत
मेरा यक़ीं करो तुम हाँ कर के देख तो लो
इक बोसे में नहीं कुछ होता है बुद्धू लड़की
शाइ'र का इक दफ़ा दिल रख कर के देख तो लो
— Chhayank Tyagi















