मैं हूँ आधा दुनिया और हूँ आधा पागल

ऐसी बातें करता है पर पूरा पागल

मेरा दिलबर इतना बुद्धू अहमक़ लेकिन
जैसा भी है मुझ को प्यारा मेरा पागल

बोले दुनिया है मुझ को मजनूँ और शाइ'र
मेरे अंदर मिर्ज़ा पागल राँझा पागल

दुनिया बोले नादानी है अल्हड़पन की
ऐसा है तो मीरा पागल राधा पागल

यूँ फिरता हूँ जो दर दर हो के तन्हा मैं
मेरे अंदर रहता है कोई तन्हा पागल

कहने से कुछ भी मुझ को अब डर लगता है
मेरे भीतर अंधा पागल बहरा पागल

यार मिरे सारे ही यकसाँ बरखा पागल
तारे पागल सूरज पागल चंदा पागल

यार ज़रूरत थी जब कोई न आश्ना था
जब आँसू ख़ुश्क हो गए तो सहरा पागल

ख़ुद को समझे ख़ुश-क़िस्मत वो मुझ पागल से
फिर तो है 'त्यागी' सल्तनत का राजा पागल

— Chhayank Tyagi

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