मेरे दिल में एक गुल-रू
मानो फूलों में हो ख़ुशबू
तुम भी हो थोड़े से पागल
हम भी हैं थोड़े से बुद्धू
इतनी सुंदर हैं नहीं वो
ये तो ग़ज़लों का है जादू
आँखें सागर लब हैं साहिल
उस पे है फंदे से गेसू
सारे शाइ'र इश्क़-ए-हामी
कैसा मुल्ला कैसा हिन्दू
होते जो तुम मेरे जानम
आँखों में होते न आँसू
— Chhayank Tyagi















