आज कल तो ये हुनर भी आना चाहिए 

लत लगा के अपनी छोड़ जाना चाहिए

उस ने तो तुझे भुला दिया है कब का बस
अब तुझे भी उस को भूल जाना चाहिए

ज़िंदगी तो जाती है निभाने में वफ़ा
छोड़ने का क्या है बस बहाना चाहिए

उस की बेवफ़ाई पे ही सिर्फ़ क्यूँ लिखो
उस की आँखों पे भी शे'र होना चाहिए

इस शनावरी पे नाज़ भी अहम है पर
ऐसी आँखों  में तो डूब जाना चाहिए

हर दफ़ा ये क्या कि तुम ही रूठो इश्क़ में
अब तुम्हें भी तो कभी मनाना चाहिए

एक शख़्स रटने में लगे हैं साल दो
अब उसे भुलाने को ज़माना चाहिए

उम्र भर के मुंतज़िर को कुछ  नहीं मिला
शाइरों को  बे-वफ़ा ही होना चाहिए

— Chhayank Tyagi

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