इश्क़ में दीवानों की हर इक कहानी याद है
याद हैं वो ग़ज़लें उन
में मख़्फ़ी मानी याद है
हम ने काफ़ी कोशिशें की भूल जाऍं तुझ को हम
भूल बैठे ख़ुद को ही और तू ज़बानी याद है
दोस्त फूँका है कलेजा तेरे ख़त न फूॅंके हैं
तेरे दिल का हर निशाना हर निशानी याद है
हिज्र की अंगीठी पे जलता हुआ वो क़ैस और
काली आँखों से टपकता लाल पानी याद है
याद है वो लड़का वो जो बावला सा फिरता था
मैं ही था वो और वो मेरी फ़लानी याद है
— Chhayank Tyagi















