samajh bhi aate hain lafzon ko saada bolta hooñ | समझ भी आते हैं लफ़्ज़ों को सादा बोलता हूँ

  - Danish Naqvi

समझ भी आते हैं लफ़्ज़ों को सादा बोलता हूँ
घुटन में रह कर भी कितना कुशादा बोलता हूँ

सबब ये है कि किसी ने नहीं सुनी मेरी
इसीलिए तो मैं तुझ सेे ज़्यादा बोलता हूँ

मैं अहद तोड़ता हूँ उस सेे बे-कलामी का
वो एक बार बुला ले तो वा'दा बोलता हूँ

यक़ीन करो कि मुझे बोलने का शौक़ नहीं
तुम्हारे साथ यूँँ ही बे-इरादा बोलता हूँ

करेगा याद कि कैसा साही मिला तुझको
भिखारी जा मैं तुझे शहज़ादा बोलता हूँ

मुझे पता है कि इसके बाद क्या होगा
इसी लिए तो शज़र को बुरादा बोलता हूँ

  - Danish Naqvi

Wada Shayari

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