समझ भी आते हैं लफ़्ज़ों को सादा बोलता हूँ
घुटन में रह कर भी कितना कुशादा बोलता हूँ
सबब ये है कि किसी ने नहीं सुनी मेरी
इसीलिए तो मैं तुझ सेे ज़्यादा बोलता हूँ
मैं अहद तोड़ता हूँ उस सेे बे-कलामी का
वो एक बार बुला ले तो वा'दा बोलता हूँ
यक़ीन करो कि मुझे बोलने का शौक़ नहीं
तुम्हारे साथ यूँँ ही बे-इरादा बोलता हूँ
करेगा याद कि कैसा साही मिला तुझको
भिखारी जा मैं तुझे शहज़ादा बोलता हूँ
मुझे पता है कि इसके बाद क्या होगा
इसी लिए तो शज़र को बुरादा बोलता हूँ
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