अदा में 'इश्क़ यही तो है सादगी मेरी
न बे-वफ़ा से है थोड़ी सी दुश्मनी मेरी
मैं दे रहा हूँ उसे एक साल का मौक़ा
बता दे एक मुहब्बत में वो कमी मेरी
दिखा के झूठी मुहब्बत मुझे सलीक़े से
उसी ने की है ये बर्बाद ज़िंदगी मेरी
लगा रहा है तू मुझ पर फ़रेब की तोहमत
समझ ले कितनी है कमज़ोर दोस्ती मेरी
दोबारा फिर वो कभी लौट कर नहीं आया
सभी ने देखी है 'दानिश' ये बेबसी मेरी
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Danish Balliavi
our suggestion based on Danish Balliavi
As you were reading Jalwa Shayari Shayari