वो कल तलक भी कर रहा था जो हिमायत 'इश्क़ की
जाने वो फिर क्यूँ कर रहा है अब मज़म्मत 'इश्क़ की
उसका भी तोड़ा है किसी ने दिल बुला कर 'इश्क़ में
साहब वो लड़का सब समझता है सियासत 'इश्क़ की
बर्बाद हो कर अपने पहले 'इश्क़ में वो कहता है
हाँ ज़िंदगी में अब नहीं सहनी है ज़हमत 'इश्क़ की
कुछ लोग यूँँ ही 'इश्क़ करने से मना भी करते हैं
मालूम है अच्छे से उसको क्या है ज़िल्लत 'इश्क़ की
बस रोते हैं चिल्लाते हैं यूँँ 'इश्क़ में मर जाते हैं
''दानिश'' पता कर तू यही है अब हक़ीक़त 'इश्क़ की
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