बहुत बड़ी मैंने की है ग़लती किसी पे यूँँ इख़्तियार करके
निचोड़ कर रख दिया है दिल को किसी ने इस दिल पे वार करके
था ख़ूबसूरत मेरा चमन पर न अब बची है कोई भी रंगत
है अब नदामत चमन को मेरे यूँँ अपने फूलों को ख़ार करके
किसी ने दिल को दुखा के मुर्शद न लौट कर के दुबारा आया
बहुत ही मायूस हो चुका हूँ किसी का मैं इंतिज़ार करके
मेरी इन आँखों में आँसू दे कर न सामने आते हैं कभी भी
किसी ने मोड़ा है अपना चेहरा यहाँ पे यूँँ आँखें-चार करके
लगी है दिल पर जो बेवफ़ाई कि ज़िंदगी सब उजड़ गई है
गँवाया है मैंने ख़ुद को 'दानिश' किसी से शिद्दत से प्यार करके
Read Full