उस ने जाते हुए कुछ कहा ही नहीं
यूँ लगा वो मुझे जानता ही नहीं
मिल गया आसमाँ मिल गई है ज़मीं
सब मिला है मगर वो मिला ही नहीं
ख़्वाब सारे मिरे ख़्वाब ही रह गए
मैं ने जो सोचा था वो हुआ ही नहीं
उस की ख़ुशहाली की कौन देगा ख़बर
जब किसी से मिरा राब्ता ही नहीं
मैं बड़ा हो गया हूँ मगर बचपना
मेरे दिल से कभी भी गया ही नहीं
इश्क़ से मेरा दिल भर गया है मगर
मय-कदे से मिरा दिल भरा ही नहीं
उम्र भर की सज़ा मिल गई है मगर
क्या हुई है ख़ता ये पता ही नहीं
बाप ने जो किया मेरी ख़ातिर किया
अपनी ख़ातिर वो कुछ चाहता ही नहीं
— Divyansh Rawat














