khushk dariyaa pada hai KHvaahish ka | ख़ुश्क दरिया पड़ा है ख़्वाहिश का

  - Ejaz Rahmani

ख़ुश्क दरिया पड़ा है ख़्वाहिश का
ख़्वाब देखा था हम ने बारिश का

मुस्तक़िल दिल जलाए रखता है
है ये मौसम हवा की साज़िश का

उस से कहने को तो बहुत कुछ है
वक़्त मिलता नहीं गुज़ारिश का

कोई उस से तो कुछ नहीं कहता
बो रहा है जो बीच रंजिश का

पा-ब-ज़ंजीर चल रहे हैं जो हम
ये भी पहलू है इक नुमाइश का

फूल कल थे तो आज पत्थर हैं
ये भी अंदाज़ है सताइश का

मैं ने आँखों से गुफ़्तुगू कर ली
ये हुनर है ज़बाँ की बंदिश का

खिल रहे हैं गुलाब ज़ख़्मों के
शुक्रिया आप की नवाज़िश का

जारी मश्क़-ए-सुख़न रहे 'एजाज़'
कुछ सिला तो मिलेगा काविश का

  - Ejaz Rahmani

Kashmir Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Ejaz Rahmani

As you were reading Shayari by Ejaz Rahmani

Similar Writers

our suggestion based on Ejaz Rahmani

Similar Moods

As you were reading Kashmir Shayari Shayari