ab to paas mere kuchh bhi muskuraane ko nahi | अब तो पास मेरे कुछ भी मुस्कराने को नही

  - Om Shukla

अब तो पास मेरे कुछ भी मुस्कराने को नही
अब के गर गया फिर मैं लौट आने को नही

  - Om Shukla

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As you were reading Shayari by Om Shukla

    ख़ुद के साथ दिल अब इतनी तो मुरव्वत करना
    कुछ भी हो जाये मगर अब न मोहब्बत करना
    Om Shukla
    हुआ न हमसे जब जब्त तो चले आये
    कहे गए जब कमबख्त तो चले आये

    मोम सा बदन था उस दिलकशी का
    दिल था पर बहुत सख्त तो चले आये

    परिंदों का मन लगा था बियाबान में
    सूखे जो सभी दरख़्त तो चले आये

    बुरे हालात में हमने साथ दिया उनका
    आया जो अच्छा वक्त तो चले आये

    ऐसा न था कि जंग थी मुहब्बत पर,
    खाई हमने जब शिकस्त तो चले आये
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    Om Shukla
    हो गया हूँ शायर सा,
    दिल मे है कुछ खंजर सा

    तुम अब अपने लगते हो,
    कह लो इसको दिलबर सा

    नया नया सब सीख रहा हूँ,
    पाया तुमको रहबर सा

    हम को तुमसे इश्क़ हुआ है
    पहन लो हमको जेवर सा

    उतने जरूरी हो अब तुम
    शादी में ज्यों कोहबर सा

    याद ऐसे आते हो तुम
    ससुराल में पीहर सा
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    Om Shukla
    मुफलिसी के मारे हम
    जाएं किस चौबारे हम

    अपनी खुशियां, जिम्मेदारी
    पहले किसे सवारें हम

    चादर न हो तो बतलाओ
    कितना पाँव पसारे हम

    दुनिया चाहे जो भी कह ले
    माँ की आँख के तारे हम

    मन मझधार सा चंचल है
    हैं ठहरे हुए किनारे हम
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    Om Shukla
    मुझसे भी अच्छी लड़कियाँ हैं इस जमाने में
    प्यासे को दरिया दीजे, समन्दर न दीजिये
    Om Shukla

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