नदी में मछुआरे सा यूँँ जाल न रखो

सुनो, तुम मेरा झूठा ख़याल न रखो

— Om Shukla

Om Shukla की और रचनाएँ

इसी क़लम से और sher

Om Shukla की सभी रचनाएँ देखें →

Nadii Shayari

nadii के शेर।

सभी Nadii Shayari शायरी →

मिलते-जुलते शायर

उसी अंदाज़ की आवाज़ें

मूड से ब्राउज़ करें

एहसास के अनुसार शायरी