मुझ को इक महबूब मिला है इश्क़ बताओ क्या करना है

इक सहरा में फूल खिला है इश्क़ बताओ क्या करना है

अब तब मैं ये सोच रहा था सारी कमियाँ बस मुझ
में है
मुझ को उस से आज गिला है इश्क़ बताओ क्या करना है

ऊब उदासी तन्हाई से दिन पर राज किया करता था
मेरे दुख का ताज हिला है इश्क़ बताओ क्या करना है

पाने की कोई आस नहीं है खोने का डर लगता है बस
कुछ ऐसा दुश्वार मिला है इश्क़ बताओ क्या करना है

— gabruu govind

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