जहाँ के देख कर जाहिल मेरा दिल बैठ जाता है

न हो ये ज़ीस्त का हासिल मेरा दिल बैठ जाता है

मैं बदले में मोहब्बत के क़यामत से भी लड़ जाऊँ
मोहब्बत काम है मुश्किल मेरा दिल बैठ जाता है

फ़क़त तू यार है इस बात पे दिल को मनाया है
तू ऐसे तो गले मत मिल मेरा दिल बैठ जाता है

तेरे घर से निकलने को खड़ा होता हूँ सौ सौ बार
बड़ा जिद्दी है मेरा दिल मेरा दिल बैठ जाता है

समझ आता नहीं मैं बिन तेरे जी पाऊँगा कैसे
तेरा घुटना भी जाए छिल मेरा दिल बैठ जाता है

— Gagan Bajad 'Aafat'

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Ehsaas Shayari

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