दिल तेरा इक आईना है
आईने से डरना
अपने जैसी सूरत देख के
यूँही न उस पे मरना
सूरत तो सपना है मूरख
एक झलक दिखलाए
दुख-सुख इक लम्हे की छाया
आए भी और जाए
तू क्यूँ इक लम्हे की ख़ातिर
अपना मान गँवाए
दिल तेरा इक आईना है
आईने से डरना
अपने आप न मरना
— Ghalib Ahmad















