vo to baithe rahe sar jhukaaye hue | वो तो बैठे रहे सर झुकाए हुए

  - Hafeez Banarasi

वो तो बैठे रहे सर झुकाए हुए
जादू उन की निगाहों के चलते रहे

मुश्किलों ने बहुत राह रोकी मगर
जिन को मंज़िल की धुन थी वो चलते रहे

मैं उन्हें भी गले से लगाता रहा
मेरे बारे में जो ज़हर उगलते रहे

हम तो क़ाएम रहे अपनी हर बात पर
तुम ब-रंग-ए-ज़माना बदलते रहे

याद के जुगनुओं से वो आलम रहा
दीप बुझते रहे दीप जलते रहे

हम ने दामन न अपना भिगोया 'हफ़ीज़'
दिल में तूफ़ान लाखों मचलते रहे

  - Hafeez Banarasi

Manzil Shayari

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