belon par toffee khil jaa.e | बेलों पर टॉफ़ी खिल जाए

  - Haidar Bayabani

बेलों पर टॉफ़ी खिल जाए
चाय कॉफ़ी नल से आए
बिस्कुट डाली डाली झूले
बच्चा बच्चा जिस को छू ले
बगिया होगी कितनी प्यारी
लड्डू हों जब क्यारी क्यारी
बूँदें टपके बूँदीं बन कर
बर्फ़ी फैले घर की छत पर
हलवे का बादल घर आए
ऐसा काश कभी हो जाए
पेड़ों पर पेड़े लग जाएँ
जब चाहें हम तोड़ के खाएँ
हर जानिब सोहन हलवा हो
बालूशाही का जल्वा हो
झरना ख़ैर का बहता जाए
ख़ूब जलेबी तैरती आए
बेरी पर जब मारें पत्थर
खील बताशे टपकें दिन भर
बच्चा खाए बूढ़ा खाए
ऐसा काश कभी हो जाए
क़ुलफ़ी का मीनार खड़ा हो
हर तारे में केक जुड़ा हो
निकलें जब सड़कों पर घर से
मोती-चूर के लड्डू बरसे
मीठे दूध की बरसातें हों
पेठे की सब सौग़ातें हों
फ़ालूदे से हौज़ भरा हो
लस्सी का दरिया बहता हो
बारिश आ कर रस बरसाए
ऐसा काश कभी हो जाए
नफ़रत हो कड़वी बोली से
उल्फ़त हो हर हम-जोली से
शीरीं कर दें दुनिया सारी
प्यार से भर दें दुनिया सारी
दुनिया में हर काम हो शीरीं
अव्वल आख़िर नाम हो शीरीं
सब से 'हैदर' बोलो मीठा
मीठा खा कर बोलो मीठा
शीरीनी होंटों पर छाए
ऐसा काश अभी हो जाए

  - Haidar Bayabani

Duniya Shayari

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