अगर ये ज़िंदगी रूठे तो फिर अनजान होती है
नज़र आती है जो भी राह वो सुनसान होती है
जहाॅं उल्फ़त नहीं बसती वहाॅं भी लोग रहते हैं
वहाॅं भी ज़िंदगी होती है पर वीरान होती है
यहाॅं तहज़ीब की दौलत हमारी मिल्कियत में है
अदब की राह पर चलना हमारी शान होती है
ये हिंदुस्तान है हिंदू-मुसलमाॅं साथ रहते हैं
हमारी एकता सब से बड़ी पहचान होती है
जो ख़ुद को रब समझते थे उन्हें भी मौत आई थी
ख़ुदा बस एक है जिस की निराली शान होती है
— Hameed Sarwar Bahraichi















