जो पहली मुलाक़ात बरसात होगी
तो फिर मेरे हमदम वो क्या बात होगी
फ़लक पर सितारे हैं तुझको पुकारे
चले आओ छत पर हसीं रात होगी
विसाल-ए-सनम में सुकूॅं ही सुकूॅं है
मुझे भी मिले तो ये सौग़ात होगी
यूँँॅं बदनाम करना नहीं मेरी फ़ितरत
मुझे भी पता है मेरी मात होगी
जो बिन माॅंगे मिल जाए वो है मुहब्बत
ख़ुशामद करोगे तो ख़ैरात होगी
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