zaraa si der ko ham kya sharaafat par utar aa.e | ज़रा सी देर को हम क्या शराफ़त पर उतर आए

  - Harsh saxena

ज़रा सी देर को हम क्या शराफ़त पर उतर आए
ये बुज़दिल लोग भी हम सेे बग़ावत पर उतर आए

मुझे बर्बाद करने की रहीं जब साज़िशें नाकाम
मेरे दुश्मन मुझी से फिर मोहब्बत पर उतर आए

त'अल्लुक़ ख़त्म होने में अभी कुछ वक़्त बाक़ी है
मैं इतना चाहता हूँ वो शिकायत पर उतर आए

तेरी तस्वीर भी होती तो कुछ दिन काम चल जाता
यूँँ ही थोड़ी न हम काफ़िर इबादत पर उतर आए

अज़िय्यत में भी वो दामन इसी ख़ातिर नहीं छोड़ा
कभी शायद वो ख़ुश होकर इनायत पर उतर आए

ज़ियादा भी मुलाक़ातें नहीं अच्छी किसे मालूम
मोहब्बत ये बदन की कब ज़रूरत पर उतर आए

मियाँ अब शा'इरी छोड़ो कमाने का भी कुछ सोचो
कहीं ऐसा न हो दिलबर भी दौलत पर उतर आए

  - Harsh saxena

Bhai Shayari

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