वीरानी में फूल खिलाना उस का पागलपन है

लेकिन कुछ भी कहो ये बेहद प्यारा पागलपन है

अपने काम भुला कर के उस की हाँ में हाँ भरना
मेरे दिल के सदके में बस अंधा पागलपन है

दरिया का सूखा पड़ जाना फूलों का मुरझाना
सब हैरानी है पर तेरा जाना पागलपन है

हर दिन दिन में एक दफ़ा बस उस को देखने की लत
मैं क्या करूँ अगर मेरा हम साया पागलपन है

क्या मैं क्यूँ अपने सहरा की जानिब निकल रहा हूँ
शायद मैं प्यासा हूँ शायद प्यासा पागलपन है

है जीत कर खुला मुझ पर ये दुनिया के बारे में
खेल नहीं है ये दुनिया ये दुनिया पागलपन है

चाहत थी आबाद रहे पर मर जाए भी चाहा
मेरी कैसी मजबूरी है कैसा पागलपन है

इन आँखों के काले घेरों का कुछ सबब तो होगा

ख़्वाब नहीं नींद भी नहीं तो है क्या पागलपन है

ये पागलपन तेरी माँगी हुई दुआ है 'हर्षित'
आड़ा सीधा जैसा भी है तेरा पागलपन है

— harshit karnatak

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