उस पार जिस को पाने की जिन लोगों में उम्मीद हैकैसे कहूँ उन को कि वो जो चीज़ है बेदीद हैदीवार क्यूँ बढ़ने लगी है हर किसी के बीच मेंये सब फ़क़त बातें नहीं ये सब मेरी तन्क़ीद है— harshit karnatak