नुक़्सान नफ़ा कुछ नहीं पर बाँट रहे हो
तुम बाप के जीते-जी ये घर बाँट रहे हो
ये लाश मिरी देख के अंजान बने हैं
इन लोगों को तुम कैसी नज़र बाँट रहे हो
तुम भी तो बहुत करते थे कल अम्न की बातें
कुर्सी के लिए आज बशर बाँट रहे हो
ख़ुद आप के बच्चे तो विदेशों में हैं पढ़ते
पर हम को तो दंगों का हुनर बाँट रहे हो
'हस्साम' तुम्हें ख़ुशियों से है दुश्मनी शायद
जो ले के हथेली पे जिगर बाँट रहे हो
— Hassam Tajub















