dushmanon se bhi dosti rakhi | दुश्मनों से भी दोस्ती रक्खी

  - Himanshi babra KATIB

दुश्मनों से भी दोस्ती रक्खी
मैंने हाथों पे ज़िंदगी रक्खी

मेरे हालात चाहे जो भी थे
तेरे ख़ातिर कभी कमी रक्खी

एक लड़के पे ज़िंदगी वारी
एक लड़की सदा दुखी रक्खी

हमने तुझको भुलाने की ख़ातिर
कैसे कैसों से दोस्ती रक्खी

मेरा बर्बाद होना बनता था
सबसे पहले तेरी ख़ुशी रक्खी

  - Himanshi babra KATIB

Mood off Shayari

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    Himanshi babra KATIB
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