हवा की नज़र से बचा आते आते
कहीं बुझ न जाए दिया आते आते
जहाँ से गुज़रना नहीं था वहीं से
मिला ज़िंदगी का पता आते आते
न मालूम ये कितनी मौतें मरी हैं
तुम्हारे लबों तक दुआ आते आते
नमाज़ी या काफ़िर कोई तो बता दे
दिखा क्या किसी को ख़ुदा आते आते
तुम्हारे मकाँ से हमारे मकाँ तक
कहाँ पे रुकी है घटा आते आते
— habib kinkhabwala














