लब थे ख़ामोश नज़रों ने ही बात कीहम ने यूँ आख़िरी वो मुलाक़ात कीसिर्फ़ पलकें ही थी भीगती रह गईंजाने कैसे ख़ुदा ने वो बरसात की— Shivam Mishra