अगर दिल मान ले कहना हमारा
तो हो सकता है कुछ अच्छा हमारा
अभी होगा नहीं सौदा हमारा
अभी ईमान है ज़िंदा हमारा
हमारा हाल ख़ुद ही जान लेंगे
पढ़ेंगे लोग जब चेहरा हमारा
तुम्हारे नाम की माला मिलेगी
कोई खोलेगा जब बक्सा हमारा
बुलाएँगे तुम्हें हम नाम ले कर
अगर हो जाएगा रिश्ता हमारा
अभी ना-कामयाबी है चरम पे
करेगा क्यूँ कोई चर्चा हमारा
ग़ज़ल-गोई मुहब्बत है हमारी
किसी ने दिल नहीं तोड़ा हमारा
इसी उम्मीद में ज़िंदा हैं 'सागर'
कभी तो वक़्त बदलेगा हमारा
— SAAGAR SINGH RAJPUT















