उदासी जान की दुश्मन बनी है
बहुत ख़तरे में मेरी ज़िंदगी है
नहीं आए हैं अच्छे दिन अभी तक
मिरी हालत बहुत ज़्यादा बुरी है
सहारा चाहिए मुझ को तुम्हारा
पता इस वक़्त मेरा बम्बई है
इधर टुकड़े मिरे दिल के पड़े हैं
उधर माशूक़ मेरी हँस रही है
लिबास उस का नहीं है तंग बेटे
तिरे सर में ही कोई गंदगी है
वो दफ़नाती है पहले रूह अपनी
जो औरत जिस्म अपना बेचती है
मैं अच्छे शे'र अब कहने लगा हूँ
ये उस के इश्क़ की जादूगरी है
चराग़ों से सजा दो हर गली को
मिरी माशूक़ की घर वापसी है
मैं उतनी ही मुहब्बत दे सकूँगा
मुझे जितनी मुहब्बत मिल रही है
तुझे देवी समझ कर पूजता है
तिरे 'सागर' की ये दीवानगी है















