नज़्म: मोहब्बत
मोहब्बत में कोई लड़का
मोहब्बत में कोई लड़की
कभी जब मुब्तला होते
तो अपनों से जुदा होते
जो हासिल हो तो पागलपन
जो ला-हासिल तो पागलपन
मोहब्बत में अज़िय्यत है
मुझे इस से शिकायत है
मोहब्बत शख़्सियत है जो
बहुत ख़ुदगर्ज़ होती है
बहुत कमज़र्फ़ होती है
भुला देती है दुनिया को
बसा लेती नई दुनिया
मोहब्बत मैं नहीं करता
मोहब्बत का मुख़ालिफ़ हूँ
मैं डरता हूँ मोहब्बत से
मोहब्बत दर्द देती है
मोहब्बत जान लेती है
मोहब्बत बेवकूफ़ी है
— S M Afzal Imam















