
यही कहता हूँ मैं सब सेे, मोहब्बत कर नहीं सकता
किसी पर मर चुका हूँ मैं, किसी पर मर नहीं सकता
मगर ऐसा नहीं बिल्कुल के सब कुछ भूल जाउँगा
दिया है ज़ख़्म जो तू ने कभी वो भर नहीं सकता
— S M Afzal Imam
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