फिर न कोई मिली तुझसी चंचल मुझे
कर सके अपने पीछे जो पागल मुझे
है ये मेरा भरम तो भरम ही सही
याद तूने किया है मुसलसल मुझे
मैं जो तुझको मिला तू मुकम्मल हुआ
और तूने किया फिर मुकम्मल मुझे
अब भी हैरत में हूँ उसने सौंपा है ख़ुद
आँख आँसू हया और काजल मुझे
उसकी चाहत का मैंने भरम रख लिया
जब कहा कर गई है वो घायल मुझे
यार अफ़ज़ल मैं इतना भी अच्छा नहीं
मानते जितना हैं लोग अफ़ज़ल मुझे
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