है जो क़िस्सा बहुत लंबा हमारा
कोई सुनता नहीं क़िस्सा हमारा
कई पत्थर किसी ने मारे दिल पर
मगर टूटा नहीं शीशा हमारा
बुरा है देखना तुम को अगर तो
इरादा है नहीं अच्छा हमारा
क़दम बढ़ते नहीं है उस की जानिब
ख़मोशी रोके है रास्ता हमारा
सदा तुम को डराते ही रहेंगे
कभी हम तो कभी साया हमारा
— S M Afzal Imam















